वन रक्षा बंधन
एक समय कि बात जब अखंड भारत हुआ कर था सभी प्रकार से सम्पन्न हुआ करता था अनेक प्रकार के खनिज संपदा से भरा पड़ा था भारत में हर तरफ हरियाली था यहाँ पेड-पौधे मन मोहक लगते था चुकि उस समय पेड-पौधे थे इसलिए सारे कार्य समयानुसार हुआ करता था सारे ऋतु समयानुसार आते थे पहले सभी को पता होता था कि चार महीने गर्मी होगा चार महीने सर्दी होगा और चार महीने बरसात होगा इसलिए हमारे पुर्वज पहले से काम को ऋतु के अनुसार करते थे किसानों को पता होता था कि बरसात में कौन सा फसल लगना है गर्मी में कौन सा फसल लगना है और सर्दी में कौन सा फसल लगना है इसलिए उस समय भारत सम्रद्धि हुआ करता था उस समय किसी प्रकार से प्रकृति अपदा का डर नहीं होता था समयानुसार कृषि होता था
परन्तु जैसे जैसे भारत कि जनसंख्या बढती गई प्रकृति का नुकसान होते गया पेड-पौधे कटाई होने लगा जिससे जलवायु परिवर्तन होने लगा हमारे देश के जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण विदेशी आक्रमणकारी है जो हमारे प्रकृति से बहुत छेड़छाड़ किया है सबसे पहले अरब आक्रमणकारी आये और पेड-पौधे को अन्धा-धुन कटाई किया वनों में आग लगवा दिया जिससे बहुत सारे जीव-जन्तु मारे गए जिसके कारण प्रकृति असंतुलन होने लगा अरब आक्रमणकारी हमारे प्रकृति का नुकसान तो कि लेकिन हमारे प्रकृति का नुकसान पहुंचाने का मुख्य कारण अन्ग्रेज है जो आज तक भारत के लोग भुगत रहे हैं अन्ग्रेजो ने भारत के महंगे पेड-पौधे कि कटाई किया और अपने देश ले गए दुनिया के हर कौने में इसका व्यापार किया और पैसा कामये जब अन्ग्रेजो ने रेलवे का काम शुरू किया उस समय अन्ग्रेजो बडे बडे पेड-पौधे कटवाये गए और रेलवे निर्माण मे लगवा देश के कोने-कोन पर डीपी का बनवाएंगे जहाँ पेड-पौधे कट कर लकडी इकट्ठा किया जाता था लकडियों को फिजूल मे बर्बाद किया जिसका कोई मतलब भी नहीं था विकास के नाम पर अन्ग्रेजो ने हरे-भरे क्षेत्र बर्बाद कर दिया बहुत सारे जीव विप्लुत होने लगे और धीरे-धीरे प्रकृति असंतुलन बिगडने लगा
जिसके वजा से पर्यावरण का क्षति होने लगा आज उसी का दुष्परिणाम लोग भुगत रहे है आज किसान ना समय से वीज बो पाता और ना ही समय से सिचाई कर पाता कभी किसानों को अतिवृष्टि का सामना करना पड़ता है कभी अनावृष्टि झेलना पड़ता हैं जिनके वजा से लोग आत्महत्या कर रहे हैं और किसान अपना जन्म भूमि को छोड़ कर पलायन कर रहे हैं
मैं इसी बिषय पर एक पर कहानी लिखने का कोशिश किया हूँ
एक गाँव में एक किसान रहता था उसके काफी जमीन था वह खेती बारी करता था और अपना रोजीरोटी चलता था उसका एक छोटा बेटा भी था बेटा का नाम शशांक था वह बहुत ही सुंदर और सुशील था समय बितता गया पेड-पौधे कटते गया गाँव के लोग जंगल कट कटकर अपने खेत का क्षेत्रफल बढते गए अब समय करवट ले रही थी जिसका परिणाम धरातल में दिख रहा था कभी समय पर बर्षा नहीं हो रहा था जिससे किसान आत्महत्या कर रहे थे कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि, जिसके वजह से किसानों का फसल बर्बाद हो रहे थे एक समय कि बात है गाँव में सुखा पड गया था किसान का लागत मूल्य भी प्राप्त नहीं हुआ किसान बेचारा दो जून कि रोटी के लिए दर-दर भटक रहे थे बाल बच्चे भुखे सोने पर विवाश हो गये किसान को समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे अपने बच्चें और बीबी के लिए रोटी का व्यास्था का करे किसान साहुकारों से कर्ज लेना शुरू कर दिया वह इस आश के साथ कि अगले वर्ष अच्छा बारिश हुआ तो जितना भी कर्ज लिया है वह ब्याज सहित वापस कर देगें और किसान कर्ज लिया बरसात का मौसम आया शुरू - शुरू में तो अच्छा पानी गिरा फसल का बोवाई भी हुआ किसान को लग रहा था कि पिछले साल से इस वर्ष अच्छा बारिश होगा और सारे कर्ज चुकता कर दूंगा लेकिन जिस समय फसल पकने लगा लगभग सारे सारे फसल तैयार हो गये थे कटाई शुरू होने वाला था किसान बहुत खुश था किसान का पत्नी दुबारा माँ बनाने वाली थी इस वर्ष एक नहीं दो दो खुशियाँ मिलने वाला है परन्तु ईश्वर भी किसान कि खुशियाँ नाराज हो गये गाँव में इतना भयंकर बारिश हुआ कि सारे फसल बर्बाद कर दिया किसान का सारा मेहनत बेकार हो गया किसान का सारा फसल बर्बाद हो गया किसान जो पून्जी लगाया था वह भी वसूल नहीं, किसान का सपना धरा का धरा रह गया अब किसान को चारों तरफ़ अंधेरा लगने लगा . अब किसान बेचारा क्या करे वह सपना देख रहा था कि मेरे जिन्दगी में एक नहीं दो दो खुशियाँ आने वाला है लेकिन किसान का वहा बद्कस्मिती था जो आने से पहले दूर चला गया किसान उदास रहने लगा किसान को जरा सा भी समझ में नहीं आ रहा कि अब क्या करे अपने बच्चों को कैसे पले , दूनिया के सारे ज्ञान प्रस्थिति के आगे धरी के धरी रहा गाई, फिर भी किसान अपने आप को संभालने लागा अपने आप से सवाल करने लगा कि अगर मैं उदास हो जाऊँ तो जो इस दुनिया में नई खुशी आने वाला है उसको कौन देखेगा ,इस दुनिया में आया हूँ कर्म तो करना पडेगा भगवान जो भी काम देगा वह तो करना ही पड़ेगा किसान अपने संतान के लिए अपने आपको को गिरवी रखने का स्वीकार कर लेता है और ठान लेता है कि अपने बच्चों को पलने और साहुकार को कर्ज चुकाने के लिए जो भी करना पडे, वह करूँगा
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